By : Dr. Adil Husain
चाहे दूज का चांद हो या पूर्णिमा का चांद,
या चाहे फिर वो अमावस्या का चांद ही क्यों ना हो,
मुझे उसके हर रुप से प्रेम हैं!!
ऐसे ही जैसे मुझे तुम्हारे हर रुप से प्रेम हैं,
चाहें वो तुम्हारी नादानियां हो या तुम्हारी ईमानदार मुस्कुराहट,
या चाहें वो तुम्हारी नाराज़गी ही क्यों ना हो..!
By : Hetal Rajpurohit
वो जो मनाया था तुमने मुझे पहली दफ़ा,
यू किसी और को ना मनाना,
यू दूर जा कर मत बनाना,
अपनी महोब्बत का अधूरा अफसाना,
आओ कभी दिदार की तलब है मुझे
अच्छा नहीं है यू हर रोज़ इतना किसी को सताना..!
By : Heena dangi
सुना है, कि वो मुझे अपना कहतें हैं,
लेकिन कह देने से क्या होता है,
अपना कहने और मानने में बहुत फर्क होता है,
वैसे ही फर्क ,जैसे ज़मीं और आसमां में होता है,
अगर किसी को अपना कहो, तो उसे अपनाईयत भी दो,
क्युकी सिर्फ पौधे लगा देने से कुछ नहीं होता है..
उन्हें पानी और तवाज्जह भी देना होता है,
इसीलिए, सिर्फ कहने से कुछ नहीं होता है,
कुछ करना भी होता है..!
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