Rahat chhoot jati hai

ये दिल टूट जाता है राहत छूट जाती है,
फिर से मुस्कुराने की हिम्मत छूट जाती है
 
बचपन में हमारे पास काफी वक़्त होता था,
जवानी में गुफ्तगू की फुर्सत छूट जाती है
 
सिकंदर चाहता था हुकूमत सारी दुनिया पर,
बड़े बड़े शाहों की हसरत छूट जाती है,
 
जो तुझको याद करता है उसको याद तू भी कर,
वगरना याद करने की आदत छूट जाती है,
 
जो अपनी मां की बातों पर हमेशा मुंह बनाते हैं,
"जामी" उनके हाथों से जन्नत छूट जाती है..!

Jami Ansari By : Jami Ansari

Paigaam Shayari Views - 529 8th Jan 2021

Bepanaah mohabbat logo me

"बेपनाह" मुहब्बत लोगों में बांट कर तो देखिए,
अपनी ज़िन्दगी में फिर इसका अंजाम तो देखिए,

लम्हा - लम्हा हो जाएगा आपको सुकूं हासिल,
गैर के गम में कभी आंसू बहाकर तो देखिए,

मिल जाएगी आपको सच्ची खुशी भी एक दिन,
औरों की ख़ुशी को गले लगाकर तो देखिए,

हो जाएगा तुम्हारे दिल से बोझ कम,
तन्हाई में रब के आगे गिड़गिड़ा कर तो देखिए,

हट जाएगी नफरतों की धुंध रिश्तों से,
अपने दिलों से बदगुमानियां मिटाकर तो देखिए,

हो जाएगी तुम्हे भी एक दूसरे से उल्फत,
पिछले सारे गिले - शिकवे भुला कर तो देखिए,

हो सकता है , मैं इंकार ना कर सकूं,
मुझको शाम की "चाय" पर बुलाकर तो देखिए,

मुमकिन है, फिर उसकी याद ना आए,
तमाम खत उसके जलाकर तो देखिए,

हो जाएगी दुनिया तलबगार तुम्हारी, "रुशदा",
अपने किरदार की खुशबू फैलाकर तो देखिए..!

Rushda Sadaf By : Rushda Sadaf

Paigaam Shayari Views - 309 1st Jan 2021

Mera rab mera shahid hai

वो जो हर शय में क़ादिर है,
मेरा रब मेरा शाहिद है,

वो जो दो जहाँनो का मालिक है,
मेरे हर ऐब पे वो नाज़िर है,

वो जो हर मख़लूक का ख़ालिक है,
मेरे हर राज़ उस पर ज़ाहिर है,

वो जो उम्मतीयों के लिए वाहिद है,
मेरी उम्मीदों के लिए वो शाहिर है..!

Ammara Khan By : Ammara Khan

Paigaam Shayari Views - 305 28th Dec 2020

Naarazgi chal rahi hai

सूखापन, सफेदी है हर तरफ, हरियाली से नाराज़गी चल रही है,
दुखों ने दबोच रखा है मुझे, खुशहाली से नाराज़गी चल रही है,
 
तेरी गली से जब भी देखूं, मुझको दखल देती है अक्सर,
घर की खिड़की में जो लगाई, उस जाली से नाराज़गी चल रही है,
 
खुशी का फूल कैसे खिलाऊं, मैं दिल को बाग कैसे बनाऊं,
जो है मेरा अपना माली, उस माली से नाराज़गी चल रही है,
 
परिंदे मुंडेरों पर आते नहीं है, पेड़ पर चेह- चहाते नहीं है,
उनकी शायद पेड़ की हर, डाली से नाराज़गी चल रही है,
 
कई दिनों से भूखा हूं फिर भी भूख मुझको लगती नहीं,
खाता था जिसमें खाना अक्सर, उस थाली से नाराज़गी चल रही है,
 
बचपन से अपनी जवानी तक, "जामी" सफ़र करने के बाद,
घर मेरा बन रहा है लेकिन, घरवाली से नाराज़गी चल रही है..!

Jami Ansari By : Jami Ansari

Tanhai Shayari Views - 836 27th Dec 2020

Phool daal kar jana

नफरतों को दिलों से निकाल कर जाना,
मोहब्बतों को दिलों में पाल कर जाना,
 
बड़ा तकलीफ़ देह साबित हुआ है हर बार,
यूं तेरा मेरी बातों को उछाल कर जाना,
 
तुम किस तरह हसाओगे, मेरा साथ निभाओगे,
तुम्हारी तो आदत है वादे टाल कर जाना,
 
मेरे जनाज़े में शिरकत नहीं कर सके तो क्या,
क़ब्र पे आना तो फ़ूल डाल कर जाना,
 
हर बार चले जाते हो तो बुला लेता हूं "जामी",
अब के जाना तो ज़रा देख भाल कर जाना..!

Jami Ansari By : Jami Ansari

Paigaam Shayari Views - 511 24th Dec 2020
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