Kuch naye khwab Hain Kuch nayi khwahishen

कुछ नये ख़्वाब हैं कुछ नयी ख्वाहिशें,
मेरी जिंदगी में है बेहद आजमाइशें,

ख़्वाब भी पूरे हो और नींद भी मुकम्मल हो जाए,
ए दिल कैसी हैं ये तेरी फरमाइशें,

जो भी मिलता है उसे सुना देता है तू अपनी दास्तां,
तेरे गमों की हैं ये अजब नुमाइशें..

मैं उसकी हर गलती को कुबूल कर लूं,
अब नहीं है बाक़ी मेरे दिल में ऐसी गुंजाइशें,

हर वक्त आ जाती है मेरे जहन में,
तेरी यादें  भी है कितनी लावारिशें,

मैं सही होकर भी गलत ठहरा हूं,
ये सब हैं मेरे यार की साज़िशें..

ये हुस्न, दौलत को बस जानां,
बस इसी दुनिया की हैं आराइशें..!

Rushda Sadaf By : Rushda Sadaf

Zindagi Shayari Views - 591 23rd Dec 2020

Kyun na aisa bhi ho

क्यों ना ऐसा भी हो,
लौट कर यादें नहीं वक़्त आए,

वो महफ़िल, वो मेहरबाँ ,वो हमदर्द लाए,
वो रौनकें, वो आतिशें, वो तिशनगी लाए,

क्यों ना ऐसा भी हो,
लौट कर यादें नहीं वक़्त आए,

वो राहें, वो मंज़िलें, वो मक़सद लाए,
वो राहतें, वो चाहतें, वो शाहदतें लाए,

क्यों ना ऐसा भी हो लौट,
कर यादें नहीं वक़्त आए,

वो ख़्वाहिशें, वो राईशें, वो नवाज़िशें लाए,
वो शमाएं, वो फ़िज़ाएं, वो  शौख हवाएं लाए,

क्यों ना ऐसा भी हो,
लौट कर यादें नहीं वक़्त आए..!

Ammara Khan By : Ammara Khan

Hindi Poetry Views - 675 23rd Dec 2020

Sochi jaa rahi hai

बात पुरानी खरोची जा रही है,
रूस्वाई की तरकीब सोची जा रही है,
 
मैने ही सिखाया था तुम्हे सर ऊंचा रखना,
अब मेरी ही गर्दन दबोची जा रही है,
 
मुझ से बिछड़ कर पागल हो गया वो,
बालों के साथ खाल नोची जा रही है,
 
उसकी बातें नदियों सी और ये नदी,
मेरे सर से काफी ऊंची जा रही है,
 
मुस्कुराता हूं यही सोच कर "जामी",
शायद मेरी तस्वीर खींची जा रही है..!

Jami Ansari By : Jami Ansari

Dard Shayari Views - 727 22nd Dec 2020

Khwahish Aur Zamana

सबकी अपनी दुनिया है,
सबका एक ज़माना है, 

कुछ दिन की मोहलत है,
आख़िर सबको जाना है, 

अच्छा हूँ और बुरा भी,
सबका एक पैमाना है, 

उसे यकीं है कम मुझपर,
लेकिन दोस्त पुराना है, 

अब वो नज़र नहीं आता,
पर उधर से आना जाना है, 

तुम बैठो तो पास मेरे,
तुमको गीत सुनाना है, 

इतनी शर्त नहीं रखते,
ये भी तो समझाना है, 

ख्वाबों में जाकर उसके,
बालों को सहलाना है, 

ये ख़्वाहिशें हैं जैसे फूल,
आख़िर में कुम्हलाना है..!

Dr. Adil Husain By : Dr. Adil Husain

Zindagi Shayari Views - 601 22nd Dec 2020

Muskurahata ko dhoya jaye

इस चेहरे से मुस्कुराहट को धोया जाए,
क्यों ना फुर्सत से आज कहीं बैठ कर रोया जाए,

फिर से आज कलम को स्याही में भिगोया जाए,
क्यों ना अपने ग़मो को लफ्ज़ो में पिरोया जाए,

आएंगे ना वो लौटकर चाहे ये रात भी गुज़र जाए,
अब ख़त्म करके इंतजार क्यों ना ख़ुद को ख़ुद में सुमोया जाए..!

Ammara Khan By : Ammara Khan

Dukh Poetry Views - 554 21st Dec 2020
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