Ghar Kaat raha hai

किधर काटनी थी ज़िन्दगी किधर काट रहा है,
लेकिन सभी ये कहते हैं सुपर काट रहा है,

आता था जिससे खौफ वहीं काम कर के वो,
दिल में पुराना बैठा हुआ डर काट रहा है,

बीते हुए दिनों का एक ये भी है मोजिज़ा,
उंगली उठा के उंगली से क़मर काट रहा है,

एक ये भी अलामत है बर्बाद ज़िन्दगी की,
खेले, पले, बड़े जहां वही घर काट रहा है,

होकर के मेरा और मुझ से ही दूरियां,
यानी परिंदा खुद के ही पर काट रहा है,

मुझपे लुटाए जान ऐसे शख़्स की तलाश में,
"जामी" हज़ार मीलों का सफ़र काट रहा है..!

Jami Ansari By : Jami Ansari

Zindagi Shayari Views - 799 7th Apr 2021

Aksar rone se

तेरी यादों में होशो हवाश खोकर, रोने से,
सुकुन ए दिल मिल जाता है अक्सर, रोने से,
 
मेरा रुमाल मेरा तकिया छोटी मोटी चीज़ हैं,
भीग जाता है सारा का सारा बिस्तर, रोने से,
 
आंसू न बहाओ किसी अजनबी के वास्ते,
कि ज़ाया हो जाते हैं आंसू रात भर, रोने से,
 
रोता हुआ ना देख ले मेरी मां अपने बेटे को,
इसलिए कतराता हूं मै अपने घर पर, रोने से,
 
अपने दामन को तर कर दूं अश्कों से "जामी"
तुम जो हो जाओ मेरी रूह को मयस्सर, रोने से..!

Jami Ansari By : Jami Ansari

Aansoo Shayari Views - 773 25th Mar 2021

Aasmaan zindagi

मेरी आसान जिंदगी की कहानी सुनो तुम,
धुआँ होती खैरियत की ज़बानी सुनो तुम,

मैंने ख़ुद को खुद में अकेले दफ़नाया है,
जाने कितनी दफ़ा जिंदा जलाया है,
सब कुछ लुटा कर जो एक बार जीये थे,
उन चंद लम्हों की नुक़सानी सुनो तुम...

ख़ौफ़ भी नहीं होता अब इस ख़याल से,
कि कोई रस्ता नहीं निकलता इस जाल से,
दर्द ज़रा रूह और ज़रा वक़्त काटता है मेरा,
अब तो रास आ गया है, हैरानी सुनो तुम...

कोई घाव नहीं हैं, कोई निशान नहीं हैं,
उस नज़र से देखें तो हम परेशान नहीं हैं,
ज़माने से पूछ बेठो कि लगते कौन हैं हम,
और फिर ये ज़ालिम बदनामी सुनो तुम...

मेरी आसान जिंदगी की कहानी सुनो तुम..!

Akshay By : Akshay

Zindagi Shayari Views - 623 18th Mar 2021

Woh Tum Nahin They

नहीं वो तुम नहीं थे जो मिले थे,
जो अब हम हैं वो पहले नहीं थे,

वो जिनसे रिश्तों में आ गईं दरारें,
वो बेबुनियाद के शिकवे गिले थे,

अब तो यादें भी धुंधली हो गई हैं,
बस इतना याद है कि हम मिले थे..!

Dr. Adil Husain By : Dr. Adil Husain

Bewafa Shayari Views - 686 2nd Mar 2021

Us chhor par rehta tha

मेरा दिल ज़ोर ओ शोर पर रहता था,
मोहब्बत की पक्की डोर पर रहता था,
 
शायद उड़ गया है अब नज़र नहीं आता,
वो कबूतर जो मेरी मुंढोर पर रहता था,
 
समझदार तो बच जाते थे जैसे तैसे,
सारा इल्ज़ाम ढोर पर रहता था,
 
आखिर कैसे सुन पाता वो मेरी धड़कन,
वो शख़्स तीस वे फ्लोर पर रहता था,
 
मेरी तैराकी का ये इम्तिहान था "जामी",
वो दरिया के उस छोर पर रहता था..!

Jami Ansari By : Jami Ansari

Dukh Poetry Views - 548 1st Mar 2021
About Us
Bepanaah.in is a feeling that is very attached to our life. Like unbridled joy, unbridled pain, unbridled love. this website important for those pepole who love to write, who express own feelings. We update our website periodically with fresh shayari thats why you find unique and latest sher o shayari on Bepanaah.in
Follow Us
Facebook Likes

© Copyright 2020-24 bepanaah.in All Rights Reserved