Chitij ke pare

कहीं चिड़ियों के घोंसले, कहीं रेत के घरौंदे,
कहीं सूरज की लालिमा, तो कहीं चांद की रोशनी,
सब कुछ हैं उस क्षितिज के परे!!

कहीं उमंगो भरी सुबह, तो कहीं सुहानी सी शाम,
कहीं तपती सी दुपहरी, तो कहीं सुकून वाली रात,
सब कुछ हैं उस क्षितिज के परे!!

कहीं रुठते हैं अपने, कहीं मुस्कुराते अजनबी,
कहीं दो पल की चुप्पी, कहीं शदियों लंबी बातें,
सब कुछ हैं उस क्षितिज के परे!!

कहीं हल्की सी नोक- झोंक, कहीं हज़ारों झप्पियाँ,
कहीं रुठने की इज़ाज़त, कहीं मनाने का हक़,
सब कुछ हैं उस क्षितिज के परे!!

कहीं पाने की चाहत, तो कहीं खोने का डर,
कहीं उलझे सवाल , तो कहीं सुलझे से जवाब,
सब कुछ हैं उस क्षितिज के परे!!

कहीं गम का सरोबार, तो कहीं बेबाक मुस्कुराहटें,
कहीं यारों की महफ़िल, तो कहीं चुभता अकेलापन,
सब कुछ हैं उस क्षितिज के परे!!

कहीं अकेले मुसाफ़िर , तो कहीं तुम सा साथी,
कहीं अजनबी मुलाकातें, तो कहीं गहराती मोहब्बतें,
सब कुछ हैं उस क्षितिज के परे!!

Hetal Rajpurohit By : Hetal Rajpurohit

Zindagi Shayari Views - 651 20th Jun 2020

Ye jo noor hai chaand ka

ये जो नूर हैं इस चांद का,
ना जाने क्यों तुम्हारे चेहरे से मिलता है!
बादलों में छुप कर भी जैसे ये चांद चमकता है,
तुम्हारा चेहरा भी अनेकों परेशानी के बाद भी,
ऐसे ही तो दमकता है..!

माना की मेरे इश्क़ का ही ये खुमार है,
जो मेरी मुस्कुराहट को तुम्हारे होठों पर बिखेरता है,
और तुम्हारे अश्कों को मेरी आंखों से बहा देता है!!
ये जो नूर हैं इस चांद का...

कुछ तो मिलता-जुलता हैं तुम में और इस चांद में,
जैसे ये चांद रात के अंधेरों को कम कर देता हैं, 
वैसे जैसे मेरे जीवन के अंधेरों में तुमने रोशनी भरी है,
माना की मंजिल अभी ज़रा दूर हैं,
पर साथी तुम हो तो ये भी मंजूर हैं..!
ये जो नूर हैं इस चांद का...

तुम्हें मुस्कुराता देख ये चांद भी खिलखिला उठता है,
और तुम्हारे रुठ जाने पर ये खुद को बादलों में छुपा लेता है,
ये मेरे चेहरे का नूर भी तुमसे है,
अब चाहे मोहब्बत कहों, इश्क़ कहों या कहों इसे प्यार,
सब तुम्हीं से है!!
ये जो नूर हैं इस चांद का,
मेरे लिए ये भी तुम्हीं से हैं..!

Hetal Rajpurohit By : Hetal Rajpurohit

Mohabbat Shayari Views - 2436 9th Jun 2020

Aaj bhi sirf tera khwaab aaya

ये दिन भी गुज़र गया,
आज भी सिर्फ़ तेरा ख्वाब आया,
रास्ते की तरह तु भी कही ठहर गया,
जब मिलने का वक़्त आया,
ये दिन भी बेशर्मी से रुला गया,
इंतज़ार आंखों में नमी सा छा गया,
मगर तु ना आया,

आज भी सिर्फ़ तेरा ख्वाब आया..!

Heena dangi By : Heena dangi

Intezaar Shayari Views - 600 11th Jun 2020

Ishq ka rang

एक बार जो चढ़ा तुम्हारे इश्क़ का रंग मुझपर,
फिर वो मानों गहराता ही गया,
वो सांझ ढ़लें जब मिले थे हम, एक-दुजे में जब गुलें थे हम,
संगीत सुरिला बजा था तब,
जब तुम्हारे इश्क़ का रंग मुझपर चढ़ा था!! 

लम्हों की उलझनों में मानों हम सुलझते गए,
एक दुजे में खोकर मैं और तुम से हम हो गए,
मेरी बिखरी जुल्फों को जब संवारा था,
तो मेरा जीवन संवरता सा लगा था, 
जब तुम्हारे इश्क़ का रंग मुझपर चढ़ा था!! 

मैंने आंखों से तुम्हारे हज़ारों अनकहे अलफ़ाज़ों  को पढ़ा था,
तुम्हारे सीने पर सर रख, तुम्हारी बैचेन हुईं धड़कनों को सुना था,
मंज़िल की खबर नहीं है मुझे, पर हां मैंने खुद तुम्हें अपना रहगुज़र चुना था,
मेरा दिल उस रोज़ कुछ अलग तरहा से धड़का था, 
जब तुम्हारे इश्क़ का रंग मुझपर चढ़ा था!! 

Hetal Rajpurohit By : Hetal Rajpurohit

Romantic Shayari Views - 818 9th Jun 2020

Kaash tumse kabhi mulakaat na hoti

दिन और दोपहरी तो  किसी तरह निकल जाती,
दर्द तो तब होता था, जब तन्हाई और रात होती,

तुम अब वापस आये हो?  इसमें क्या  हैरानी है,
तुम  गए  ही  न  होते,  तो  कोई  बात  होती,

इतना लम्बा अरसा तम्हारे साथ गुजारा था हमने,
मैं भी तुम्हारी तरह भुला देता,गर शुरुआत  होती,

हमारे  भी  वो  वादे - वो  बाते, झूठे  होते  अगर,
तो शायद आज यादो की, ऐसी  न  बारात  होती,

अब वो पल याद करके  दिल  बैठ  सा  जाता  है,
सोचता हू ,काश तुमसे कभी  न  मुलाकात  होती,

Shivam Agrahari By : Shivam Agrahari

Judaii Poetry Views - 600 9th Jun 2020
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