बेदार हो गये हम तेरे ख्वाब-ए-गिरां से,
जाने कहाँ थे और चले थे कहाँ से,
जब से बेज़ार हुआ ये दिल,
बेकार हुए हर लफ़्ज मेरे,
यूं बर्बाद हुए हम तेरे दीदार से,
दामन झटक के निकले हम तेरे गुलिस्तां से..!
बेदार हो गये हम तेरे ख्वाब-ए-गिरां से,
जाने कहाँ थे और चले थे कहाँ से,
जब से बेज़ार हुआ ये दिल,
बेकार हुए हर लफ़्ज मेरे,
यूं बर्बाद हुए हम तेरे दीदार से,
दामन झटक के निकले हम तेरे गुलिस्तां से..!
By : Heena dangi
वो जो अब मुझसे इतनी, दूरियां बढ़ा रहा है,
यक़ीनन वो किसी और के करीब जा रहा है,
मै ही फ़क़त , क्या इश्क़ में डूबा हुआ था,
या वो इश्क के दरिया से, निकलकर जा रहा है,
तुम बड़े आसानी से कहते हो, कि जाने दू उसे,
वो कोई रहगुज़र नहीं, मेरा मेहबूब जा रहा है,
कहना आसान है, भूलना होता तो भुला देता,
वो सिर्फ इंसान नहीं, जिस्म से जान जा रहा है,
वो जो कुछ लम्हा था, कबका गुज़र चुका है,
फिर ये यादों का सिलसिला,क्यों चला जा रहा है,
By : Shivam Agrahari
कहीं ना कहीं उसे इस बात का अफ़सोस तो होता होगा,
वो अपने ख़्यालों में कम ही सही पर मेरा ख़्याल तो करता होगा,
गलती हीं से उसे मेरी याद तो आती होगी,
मेरे बारे में भी शायद कुछ तो बात करता होगा,
बहुत मशरूफ है वो अपनी जिंदगी में,
पर जिंदगी के कुछ पल मेरी याद में बरबाद तो करता होगा...!
जो बात दिल में हैं, वो ज़ुबां पर लाऊं कैसे?
मैं उससे मुहब्बत का इज़हार कर पाऊं कैसे??
सिर्फ उसकी यादों के सहारे ज़िन्दगी बिताऊं कैसे..?
नहीं हो सकती वो कभी मेरी, बात दिल को समझाऊं कैसे?
पहली मुहब्बत है वो मेरी ,
उसे भुला पाऊं कैसे?
इन आंखों में तस्वीर रखकर, उसकी याद में आंसू बहाऊं कैसे?
उसके दीदार के बिना "रुशदा" , मैं चैन से मर जाऊं कैसे..?
© Copyright 2020-24 bepanaah.in All Rights Reserved