Jis ke saath sapna tha Jannat tak jaane ka... Woh shakhs Duniya Jahannum kar gya ...
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Jis ke saath sapna tha Jannat tak jaane ka... Woh shakhs Duniya Jahannum kar gya ...
अंधेरे में खो कर अकेले सह रही हूँ , मैं तड़प रही इस तन्हाई में..!
तेरे इश्क़ की मैं मरीज़ बन रही हूँ, तु ज़हर मिला इस दवाई में..!!
गुजरे नहीं गुजरती राते, दिन भी कहा ढलता है.!
इज़्तिराब भरी गुजरी सारी दोपहर भी,
लगा फिर गुरूब-ए-आफताब खामखां जलता है.!
चाहत के साथ ये खफा मौसम कहा बदलता है.!
कहो सब्र कितना और,
उसका लिखा अफसाना कहा टलता है.!
ना-फहम आदतों मिजाज़ कितना झगड़ता है.!
बहक कर हजारों दफा इस काश से,
इसी से मेरा साया हर बार लिपटता है.!
है चराग़ रक्खा ऐसा न बुझे न ही जलता है.!
उस बे चिराग शब में चमकते ख़्वाब देख,
दिल ने फिर कहा ऐसा कहा चलता है..!
अकेले चलती तो हूँ मैं, लेकिन कहिं पहुँचती नहीं,
ठोकरे खाती तो हूँ मैं, लेकिन सम्भलती नहीं,
ढूंढती तो हूँ मैं, लेकिन मंज़िल मिलती नहीं,
चुप नहीं हूँ मैं, लेकिन कुछ कहती नहीं,
ठहरती तो हूँ मैं, लेकिन कहिं रहती नहीं,
अकेले चलती तो हूँ मैं, लेकिन कहिं पहुँचती नहीं,
ठोकरे खाती तो हूँ मैं, लेकिन सम्भलती नहीं..!
Na jaane kis ko pukara gale laga ke Mujhe,
Magar woh mera Na tha jo naam us ne liya...
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