Mai toh harr mod par mayassar thi,
tum ne phir bhi ganwa diye mujhe...
0
Total Poet
0
Total Poetry
0
Ghazals
0
Subscribers
Total Poet
Total Poetry
Ghazals
Subscribers
Mai toh harr mod par mayassar thi,
tum ne phir bhi ganwa diye mujhe...
milna bichdna sab kismat ka khel hai,
kabhi nafrat to kabhi dilo ka mail hai,
bik jata hai har rishta duniya me,
sirf dosti hi yaha “NOT FOR SALE” hai...
देखें मुड़कर मुस्कुराते अगर,
पल भर लगे मेहरबानी सा इश्क़ !
झुकी पलकों से इजहार हो,
यूं ही हो अगर हो खानदानी सा इश्क़ !
कभी उमड़ता बचपना,
तो कभी झलकती जवानी सा इश्क़ !
रुका सा मंज़र कहीं,
तो अब आगे बढ़ती कहानी सा इश्क़ !
जरा बावरी तो जरा बचकानी,
लगे तभी हरकत नादानी सा इश्क़!
कहीं चमकती आंखों जैसे,
तो कभी मुस्कुराहट नूरानी सा इश्क़ !
किस्सों वादो सा कहीं,
तो कभी महफ़िल में दी बयानी सा इश्क़ !
नया आहन सर्द हवाएं अगर
तो लगे की फ़िरदौस आसमानी सा इश्क़ !
कभी लगे हुक्म जैसा,
तो चलाता अपनी भी मनमानी सा इश्क़ !
मुश्किल सा लगे दस्तूर,
और लगे जो अफसाना आसानी सा इश्क़ !
कहीं ठहरा तो कहीं गहरा पानी इश्क़ !
कहीं जिस्मानी तो कहीं रूहानी सा इश्क़!
चलो मान लिया तुम्हारी भी कुछ मज़बूरी रही होगी,
और तुम्हे अपना अलग रास्ता चुनना पड़ा,
पर आखरी सांस तक इश्क़ निभाने का,
शायद एक वादा तुम्हारा ही था,
चलो मान लिया तुम्हारी भी कुछ मज़बूरी रही होगी,
और तुम्हे किसी और का हात थामना पड़ा,
पर मेरी क़ब्र पर एक आखरी गुलाब रखने का,
शायद एक वादा तुम्हारा ही था..!
© Copyright 2020-24 bepanaah.in All Rights Reserved
