मुट्ठी में रेत जैसी है आजकल की मुहब्बत,
दो पल से ज़्यादा ठहरती ही नहीं...
Do pal
By : Ruhi Singh
Mohabbat Shayari
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23rd Mar 2020
मुट्ठी में रेत जैसी है आजकल की मुहब्बत,
दो पल से ज़्यादा ठहरती ही नहीं...
मसला चाहे जो भी हो लोगों की राय मिलनी चाहिए,
अच्छे दिन मिलें न मिलें अच्छी चाय मिलनी चाहिए...
किसी को पनाह नहीं देता पहलू में अपने,
आसमान लगता है ऊंचा, पर है नहीं...
वरना कैसे हल होता मसला जिंदगी का,
शुक्र है एक दिन हम मर जाएंगे...
Chai to achi banati hai vo, bas shakkar dalna bhul jaati hai
din me kitni bhi busy ho, raat ko mere liye online aa jaati hai...
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