Guroor hamesha husn ka nhi hota,
Kbhi kbhi Kirdaar ka bhi hota hai...
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Guroor hamesha husn ka nhi hota,
Kbhi kbhi Kirdaar ka bhi hota hai...
नाराज तो नहीं हूं तुमसे ना तुमसे कोई बैर है मेरा
गुस्सा भी नहीं करता तू कौन सा गैर है मेरा
हां ये बात तो है कि थोड़ा सा ना समझ हूं मैं
समझाना नहीं आता मुझे तो इसमें क्या कसूर है मेरा
सुना है इस जहां के परे भी एक जहां है
हाथ पकड़ कर मेरा तुम वो जहां दिखा दो ना
मुझे नहीं आता इश्क करनातो क्या हुआ
आओ तुम सिखा दो ना
वादा तो नहीं करता कि आगे से तंग नहीं करूंगा मैं
हां ये कह सकता हूं कि तुम्हारे आगे अब रोज पानी भरूंगा मैं
तुम्हारा कभी पैर दुखे या सर चकराए तो कहना मुझसे
उस दर्द को भुलवाकर घंटों तुमसे बातें करूंगा मैं
सुना है तुम्हारे हाथों की लकीरों में नाम छुपा है मेरा
आज वो मेरा लिखा नाम दिखा दो ना
मुझे नहीं आता इश्क करना तो क्या हुआ
आओ मुझे सिखा दो ना, मुझे सिखा दो ना
अच्छा बाबा आज तुम्हारी जुल्फों की उलझन को मैं सुलझाता हूं
तुम थक गई होंगी ना, कोई बात नहीं आज खाना मैं बनता हूं
रात में मेरे खर्राटे तंग करते होंगे ना तुम्हें
चलो आज पूरी रात जागकर मैं तुम्हें सुलाता हूं
तुम जो भी कहो गलती तो की है मैंने तुम्हें सताकर
आज मेरी हर गलती का हिसाब मुझे लिखा दो ना
मुझे नहीं आता इश्क करना तो क्या हुआ
आओ तुम सिखा दो ना आओ तुम ही सिखा दो ना.
मेरी आँखों को पढ़ कर "काश "
तुम मेरी खामोशी को समझ पाते..!
चाय और वो,
वो चाय जैसी तलब है मेरे लिए
मैं उस चाय में घुली अदरक जैसा,
वो लोंग जैसी गरमाहट है तो
मैं उस चाय में डूबा बिस्किट जैसा
जब भी देखता हूं तुझे हर मरतबा तो
खुदा कसम तू बड़ी हॉट सी लगती है
जब भी छूता हूं तेरे लबों को मेरे लबों से तो
तू कुल्लड़ वाली चाय की पहली घूट सी लगती है
तू कुल्लड़ वाली चाय की पहली घूट सी लगती है
तू जब जब उबलती है ना तो तुझे छूने से डरता हूं मैं
हां ये बात भी है कि तुमसे बेपनाह मोहब्बत भी करता हूं मै
अब तुम ही बताओ कोई इतना गुस्सा करता है क्या
गुस्से में अपने दायरे से कोई बाहर इतना निकालता है क्या
पर तू जितनी कड़क होती है ना उतनी ही क्यूट सी लगती है
जब भी छूता हूं तेरे लबों को मेरे लबों से तो
तू कुल्लड़ वाली चाय की पहली घूट सी लगती है,
हद है यार,
आज फिर से झगड़ा हो गया हमारा,
वो कहती है कि चाय चाहिए या मै
ये फैसला करलो आज तुम
मैने हाथ रखा चाय के कप पे और निगाहें उनकी तरफ
फिर मुस्कुराते हुए कहा सिर्फ तुम
वो शायद जलती थी मेरी चाय की मोहब्बत से
लेकिन चाय तो उसको भी बड़ी स्वीट सी लगती है
जब भी छूता हूं तेरे लबों को मेरे लबों से तो
तू कुल्लड़ वाली चाय की पहली घूट सी लगती है
तू कुल्लड़ वाली चाय की पहली घूट सी लगती है..!
Meri tanhaai mujh se kehti hai ke,
Main tanhaa kyun hun,
Main ne kaha jo hamesha dusron ka
Sath deta hain, wo hamesha tanhaa hi rehta hai..!
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