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Kirdaar

Guroor hamesha husn ka nhi hota,
Kbhi kbhi Kirdaar ka bhi hota hai...

Rukhsar By : Rukhsar

Zindagi Shayari Views - 515 4th Jul 2020
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Tum Sikha do na

नाराज तो नहीं हूं तुमसे ना तुमसे कोई बैर है मेरा
गुस्सा भी नहीं करता तू कौन सा गैर है मेरा

हां ये बात तो है कि थोड़ा सा ना समझ हूं मैं
समझाना नहीं आता मुझे तो इसमें क्या कसूर है मेरा

सुना है इस जहां के परे भी एक जहां है 
हाथ पकड़ कर मेरा तुम वो जहां दिखा दो ना
मुझे नहीं आता इश्क करनातो क्या हुआ 
आओ तुम सिखा दो ना 

वादा तो नहीं करता कि आगे से तंग नहीं करूंगा मैं
हां ये कह सकता हूं कि तुम्हारे आगे अब रोज पानी भरूंगा मैं
तुम्हारा कभी पैर दुखे या सर चकराए तो कहना मुझसे 
उस दर्द को भुलवाकर घंटों तुमसे बातें करूंगा मैं

सुना है तुम्हारे हाथों की लकीरों में नाम छुपा है मेरा 
आज वो मेरा लिखा नाम दिखा दो ना 

मुझे नहीं आता इश्क करना तो क्या हुआ 
आओ मुझे सिखा दो ना, मुझे सिखा दो ना 

अच्छा बाबा आज तुम्हारी जुल्फों की उलझन को मैं सुलझाता हूं
तुम थक गई होंगी ना, कोई बात नहीं आज खाना मैं बनता हूं
रात में मेरे खर्राटे तंग करते होंगे ना तुम्हें
चलो आज पूरी रात जागकर मैं तुम्हें सुलाता हूं

तुम जो भी कहो गलती तो की है मैंने तुम्हें सताकर 
आज मेरी हर गलती का हिसाब मुझे लिखा दो ना 
मुझे नहीं आता इश्क करना तो क्या हुआ 
आओ तुम सिखा दो ना आओ तुम ही सिखा दो ना.

Maan Ashiwal By : Maan Ashiwal

Hindi Poetry Views - 778 5th Jul 2020
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Khamoshi

मेरी आँखों को पढ़ कर "काश "
तुम मेरी खामोशी को समझ पाते..!

Ammara Khan By : Ammara Khan

Dard Shayari Views - 453 5th Jul 2020
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Chai aur wo

चाय और वो, 
वो चाय जैसी तलब है मेरे लिए
मैं उस चाय में घुली अदरक जैसा,
वो लोंग जैसी गरमाहट है तो
मैं उस चाय में डूबा बिस्किट जैसा

जब भी देखता हूं तुझे हर मरतबा तो
खुदा कसम तू बड़ी हॉट सी लगती है

जब भी छूता हूं तेरे लबों को मेरे लबों से तो
तू कुल्लड़ वाली चाय की पहली घूट सी लगती है
तू कुल्लड़ वाली चाय की पहली घूट सी लगती है  

तू जब जब उबलती है ना तो तुझे छूने से डरता हूं मैं
हां ये बात भी है कि तुमसे बेपनाह मोहब्बत भी करता हूं मै

अब तुम ही बताओ कोई इतना गुस्सा करता है क्या
गुस्से में अपने दायरे से कोई बाहर इतना निकालता है क्या

पर तू जितनी कड़क होती है ना उतनी ही क्यूट सी लगती है
जब भी छूता हूं तेरे लबों को मेरे लबों से तो
तू कुल्लड़ वाली चाय की पहली घूट सी लगती है,
हद है यार,
आज फिर से झगड़ा हो गया हमारा,
वो कहती है कि चाय चाहिए या मै
ये फैसला करलो आज तुम
मैने हाथ रखा चाय के कप पे और निगाहें उनकी तरफ
फिर मुस्कुराते हुए कहा सिर्फ तुम

वो शायद जलती थी मेरी चाय की मोहब्बत से
लेकिन चाय तो उसको भी बड़ी स्वीट सी लगती है
जब भी छूता हूं तेरे लबों को मेरे लबों से तो
तू कुल्लड़ वाली चाय की पहली घूट सी लगती है 

तू कुल्लड़ वाली चाय की पहली घूट सी लगती है..!

Maan Ashiwal By : Maan Ashiwal

Chai Poetry Views - 647 5th Jul 2020
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Meri tanhaai

Meri tanhaai mujh se kehti hai ke,
Main tanhaa  kyun hun,
Main ne kaha jo hamesha dusron ka
Sath deta hain, wo hamesha tanhaa hi rehta hai..!

Ammara Khan By : Ammara Khan

Tanhai Shayari Views - 500 4th Jul 2020
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