इश्क़ है तो लौट आना इस मकान में,
चले गए हो दिल से, निकाले नहीं गए...
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इश्क़ है तो लौट आना इस मकान में,
चले गए हो दिल से, निकाले नहीं गए...
मैंने रंग इतना लगाया कि कमाल कर दिया,
उसने मेरी हाथों की छुअन का मलाल कर दिया,
कुछ लड़कों ने इस तरह भिगोया उसे,
उसने कुछ क्यों नहीं बोला मैंने सवाल कर दिया,
नजर अंदाज करके मेरी बातों का,
उसने हर सवाल का हलाल कर दिया,
खफ़ा होकर जब निकलने लगा मैं,
अधर से अधर रख उसने बवाल कर दिया...
लाज़मी नहीं कि तुझे आंखों से देखू,
तुझे सोचना भी तेरे दीदार से कम नहीं,
लाज़मी नहीं कि तुझे बस हाथों से छूकर प्यार करूं,
तेरी रूह को छूकर हुआ प्यार भी तो कम नहीं,
लाज़मी नहीं कि तुझे पाना ही जरूरी सा है मुझको,
तेरी बातों में मेरा अफसाना मिल जाए तब भी तो पा ही लिया है मैंने तुझको,
लाज़मी तो बस ये है कि अच्छी बुरी यादों में ही सही,
मैं जिंदा रहूं तुझमें एक किस्से की तरह,
चाहे जिंदगी में तू रह जाए मेरे एक अधूरे से एक हिस्से की तरह...
तुम कितनी खूबसूरत हो,
इसके लिए आईना नहीं मेरी शायरी देखा करो ।
वक्त बेवक्त की बातों में दिया मेरा साथ है,
मेरे उटपटांग से कामों में भी होता इन का हाथ है,
कुछ अजनबी लोग थे जो हर पल साथ हैं ,
बस एक कॉल की दूरी है,
उनसे कहना दिनभर की बातें सारी,
अब कितना जरूरी है,
बेशक बस गिनती के चार हैं,
पर जान से भी प्यारे हैं मेरे यार है..
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