Sharab pee rahe yani aafat ko lekar baith gaye,
Bikhre hue Baal purani aadat ko lekar baith gaye,
or bhi qisse Hain duniya me baat karne ke liye,
kya tum bhi JAMI mohabbat ko lekar baith gaye...
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याद करने लगा है कोई वक़्त-बेवक़्त,
ये हिचकियाँ इशारा हैं,
कि इक तरफ़ा मोहब्बत की शुरुआत
इस बार कहीं और से हुई है...!
जो सन्नाटा पसरा है आज शहर की चौखट पर।
क्या पाया रे मानव! तूने प्रकृति से छे़डछ़ाड कर?
नियम का पालन करलो कुछ दिन वक्त अभी भी संभलो तुम।
प्रकृति से न छेड़े होते आज न होता मौसम गुमसुम॥
डाल दी मुसीबत खुद के गले में ये तेरी नादानी थी।
नहीं बचेगा धरा पर कोई जो अब किसी ने मनमानी की॥
मसला चाहे जो भी हो लोगों की राय मिलनी चाहिए,
अच्छे दिन मिलें न मिलें अच्छी चाय मिलनी चाहिए...
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