0
Total Poet
0
Total Poetry
0
Ghazals
0
Subscribers
Total Poet
Total Poetry
Ghazals
Subscribers
सुनों चांद, हर पल बेबाक हो मुस्कुराया करो,
सीधी- सी बातों को यूं ना उलझाया करो,
हैं इश्क़ हम से बेइंतहा, मालूम है हमको,
पर फिर भी हर मौके पर ज़ाहिर करने से ना चूक जाया करो..!
हम लिखते है, और तुम पढते हो
उफ्फ, क्या गजब अनकही सी मोहब्बत करते हो!
Tere baad nazar nahi aati mujhe koi aur manzil,
Kisi aur ka hona Mere bas ki baat nahi ..!!
जब खुशियों की बारिश बेमौसम गरजती है,
खोलकर बाहे अपनी भीगते हुए,
तुम मिल जाते हो !
सज कर जब में खुद को संवारते देखना चाहती हूं,
सच कहूं तो वो आइनेके पीछे बैठ मुस्कुराते,
तुम मिल जाते हो !
थक कर में जब खुद की ही तलाशमे निकलती हूं,
बेचैन हो कर परेशान मेरे सफरमे,
तुम मिल जाते हो !
और बेताक छोड़ अपने जिस्मको जब में आराम तलाशती हूं,
मेरे ही ख़यालो में उलझकर बैठे,
तुम मिल जाते हो !
इश्क़ का दावा करते जब अपने लबों से लगाया करती हूं,
बन कर सुकून मेरी चाय के आखिर,
तुम मिल जाते हो !
© Copyright 2020-24 bepanaah.in All Rights Reserved
