मैं चढ़ रही हूँ सूली पर..!
सुनो! तुम आओगे ना मेरी बरबादी पर..!!
0
Total Poet
0
Total Poetry
0
Ghazals
0
Subscribers
Total Poet
Total Poetry
Ghazals
Subscribers
मैं चढ़ रही हूँ सूली पर..!
सुनो! तुम आओगे ना मेरी बरबादी पर..!!
सुनते तुम्हारी धड़कने वक़्त लिपट ही ना जाऊं तुम्हारी रूह से कहीं,
क्या तब फैलाकर बाहें मुझे अपने दिल में बसाओगे तुम.?
तकते तुम्हारी आंखों में अगर आशीयाना बनाने वहीं जाऊं कहीं,
क्या तब बिठाकर पलको में मुझे अपनी बनाओगे तुम.?
लड़ते तुम्हारी उंगलियों से थक कर जब रुक जाऊं कहीं,
क्या तब उलझाकर सासो में मुझे बताओगे तुम.?
समेटते तुम्हारी ख्वाहिशें अगर खुद से मुकर भी जाऊं कहीं,
क्या तब लगाकर लबो से मुझे अपनी शाम कोई बिताओगे तुम.?
दिन तबाही के करीब आया, जब वो हमें देख मुस्कराया,
जब "हर किसी" ने दिल दुखाया,
तब उसने ही तो अपनाया,
फिर क्यों "हर किसी" में उसका नाम आया...?
अक्सर उनके लफ्जों पर अपना दिल,
हार लिया करती हूं। जब भी वह मुझे देखते हैं,
तो नजरें झुका कर थोड़ा सा मुस्कुरा,
कर अपनी जुल्फें सवार लिया करती हूं..!
Bolti kam hu lekin,
logo ko chup karane ka hunar janti hu..!
© Copyright 2020-24 bepanaah.in All Rights Reserved
