बड़ी गहरी सज़ा है इस तन्हाई में,
तेरा चेहरा देखा है मैने अपनी ही परछाई में..!
0
Total Poet
0
Total Poetry
0
Ghazals
0
Subscribers
Total Poet
Total Poetry
Ghazals
Subscribers
बड़ी गहरी सज़ा है इस तन्हाई में,
तेरा चेहरा देखा है मैने अपनी ही परछाई में..!
Tu ab udaas jo baithega unke samne,
Toh phir woh Rehem hi karege, Mohabbat toh nahi...
तु दुर है फ़िर भी मेरे पास है,
तु आज भी मेरे लिये उतना ही खास हैं..!!
मेरा हर शब्द तेरे नाम है,
ये मेरी बर्बादी का आगाज़ है..!
तुझे दुर से चाहना भी मंजूर है..
ये मेरी मौत कॆ करिब जाने का एहसास हैं..!
तु आज भी मेरे लिए उतना ही खास हैं..!
सुना है, कि वो मुझे अपना कहतें हैं,
लेकिन कह देने से क्या होता है?
अपना कहने और मानने में बहुत फर्क होता है,
वैसे ही फर्क ,जैसे ज़मीं और आसमां में होता है,
अगर किसी को अपना कहो तो उसे अपनाईयत भी दो,
क्युकी सिर्फ पौधे लगा देने से कुछ नहीं होगा,
उन्हें पानी और तवाज्जह भी देना होगा,
इसीलिए
सिर्फ कहने से नहीं होगा,
कुछ करना भी होगा..!
"तन्हाई" पल भर में मिल गयी,
उम्र भर के लिए..!!
© Copyright 2020-24 bepanaah.in All Rights Reserved
