अच्छा हुआ और ज्यादा तुमने वक़्त नहीं गुज़ारे,
बहुत ज्यादा करीब आ गया था मैं तुम्हारे?
माफ़ करना अगर वक़्त जाया किया हो,
तीन बरस कही ज्यादा तो नहीं ले लिए तुम्हारे?
हमने भी कई आरजू सजाई थी साथ तुम्हारे,
कभी अकेले हों तो, तुम्हारे बालो को सवाँरे,
तुम्हारी आँखों में डूब जाये, तुमको ही निहारे,
इतनी शिद्दत से मोहब्बत किया तुमसे,
जाने फिर भी कहा से आ गयी ये दीवारें,
खैर छोडो़ बातें सब पुरानी हो गयी है,
अब तो कोई और है साथ तुम्हारे...!
