मैंने चाहा था, कि हम साथ जिएंगे,
एक नई ज़िन्दगी की शुरुआत करेंगे,
जहां ,सिर्फ तुम रहो , मैं रहूं, ना कोई तीसरा हो
फिर ना जाने क्यों तुमने बेवफाई कर ली
फिर समझ आया कि हमारे चाहने से क्या होता है,
वही होता है जो मंजूर-ए-खुदा होता है..!
Maine chaha tha ki
By : Rushda Sadaf
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Bewafa Shayari
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5th May 2020
