इलाही तू मुझे नज़दीक कर ले,
मैं तुझसे दूर कितना हो गया हूँ।
मुझे अपना पता, मेरी ख़बर दे,
मुझे लगता है अब मैं खो गया हूँ।
अजब सी तर्ज़ ए ज़िन्दग़ी हो गई है,
जहाँ हँसना था वहाँ भी रो गया हूँ।
इलाही तू मेरा अब दोस्त बन जा,
मैं दुश्मन ख़ुद का हो गया हूँ..!
